उत्तराखंड के पहाडों पर दौड़ेगी ट्रेन
पहाड़ पर चढ़ेगी ट्रेन
105 किलोमीटर लम्बे सुरंग से गुजरेगी ट्रेन
राम अनुज
journalist dehradun
पहाड़ पर रेल चढ़ाने का सपना अब परवान होता नजर आ रहा है , उत्तराखंड में अभी तक ट्रेन को पहाड पर चलाने की कवायद यूंतो फाइलों में कई सालों से दबी रही है मगर अब ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक ट्रेन चलाने की योजना जमीनी स्तर पर शुरु हो गई है यानी अब पहाड़ में ट्रेन के आने से सुखद यात्रा और रोजगार के भी दरवाजे खुलेंगे क्या है पूरा मामला -2010 - 11 में ऋषिकेश कर्णप्रयोग रेल लाइन परियोजना के सर्वे का काम शुरु शुरु हुआ जो 2017 में पूरा हुआ इसके बाद से जमीन स्तर पर रेल लाइन के बिछाने का काम शुरु हुआ उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में 90 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ने जा रही है ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक ट्रेन लाइन बिछाने का काम शुरु किया जा रहा है ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से आगे अभी ट्रेन नहीं जाती है मगर 16 हजार 264 करोड़ रुपये की लागत से ऋषिकेश - कर्णप्रयाग रेल परियोजना का काम शुरु हो गया है , अब आप को बताते है यह परियोजना इतनी महत्वपूर्ण क्यों है दरअसल उत्तराखंड में दो मंडल है एक गढ़वाल और एक कुमाउं , गढ़वाल मंडल में देहरादून , हरिद्वार , उत्तरकाशी , टिहरी , पौड़ी , रुद्रप्रयाग और चमोली जिला है जिसका बॉर्डर चाइना से लगता है . गढ़वालमंडल के हरिद्वार और देहरादून तक ही अभी ट्रेन चलती है बाकी जिलों को ट्रेन देखने को भी मिली है मगर अब ट्रेन को पहाड़ पर दौ़ड़ने की तैयारी शुरु की जा रही है आपको बता दें कि कर्णप्रयाग चमोली जिले में है जहां तक ट्रेन जा रही है ,
ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना में कुल 12 नये रेलवे स्टेशन बनेंगे ,वीरभद्र,नया ऋषिकेश , शिवपुरी , व्यासी , देवप्रयाग , मलेथा , श्रीनगर , धारी , रुद्रप्रयाग , घोलतीर , गोचर और कर्णप्रयाग इन सभी स्टेशन का निर्माण कार्य किया जायेगा. पहले चरण में 6 किलोमीटर के ट्रैक पर काम शुुरु हो गया है यानी जब ट्रेन ऋषिकेश से निकालेगी तो चद्रभागा नदी को क्रास करते है पहाड़ के 125 किलोमीटर की यात्रा कर्णप्रयाग तक शुरु हो जायेगी जो पहाड़ों से होकर गुजरेगी
इस परियोजना का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि इस रेलवे ट्रैक का 84.24 फीसदी हिस्सा टनल यानी सुरंग में बनेगा .सबसे बड़ी बात है 125 किलोमीटर में से 105 किलोमीटर तक ट्रेन महज टनल से होकर गुजरेगी यानी पूरी ट्रेन करीब 20 किलोमीटर दूरी तक ही नजर आयेगी .परियोजना के तहत कुल 17 टनल तैयार किये जायेंगे . साथ ही कुल 35 नये पुलों का निर्माण किया जायेगा .जिसमें से एक पुल का निर्माणकार्य बहुत जोर शोर से चल रहा है कोलकाता बेस एक निजी कंपनी जीपीटी ने पुल का निर्माण कार्य शुरु कर दिया है
इस परियोजना 2025 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है , दूसरी तरह टनल के निर्माण के लिए जल्द ही टेण्डर की प्रक्रिया शुरु होने जा रही है इस परियोजना के बनने से कर्णप्रयाग तक की यात्रा काफी आसानी हो जायेगी साथ रोजगार के नये आयाम भी खुलेंगे
ऋषिकेश एक पर्यटक नगरी है जहां से चारधाम यात्रा की शुरुआत होती है इतनी ही नहीं ऋषिकेश हमेशा से अपने आध्यात्मिक डिस्टिनेश के तौर पर सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा है ..दूसरी तरह यहां तक अभी ट्रेन आती है यहां से आगे जाने के लिए सैलानियों को मोटरमार्ग से जाना पड़ता है ऐसे में ऋषिकेश कर्णप्रयाग परियोजना सैलानियों को टनल की रोमांचक सफर करायेगी
यह रेल परियोजना उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है.. क्योंकि देहरादून , टिहरी , पौड़ी , रुद्रप्रयाग , और चमोली जिले के लिए रोजगार के नये अवसर खोल सकती है इन जिलों में ट्रेन पहुंचने से पर्यटन बढेगा ----जिससे स्थानीय लोगों को रोजागार मिलेगा , क्योंकि पहाड़ में 12 नये रेलवे स्टेशन खुलेंगे जिससे पहाड़ की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि रेल प्रोजेक्ट को लेकर हर संभव काम किये जा रहे है जिससे तय समय पर परियोजना को पूरा किया जा सके ------
और दशको से पहाड़ के लोग ट्रेन देखने का सपना देख रहे है वो भी साकार होगा
ऋषिकेश कर्णप्रयाग परियोजना को लेकर लोगों को बड़ी उम्मीदें है , स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ में ट्रेन जाने से काफी राहत होगी--- इससे यात्रा का समय कम हो जायेगा , और आसानी से लोग कर्णप्रयाग क तक अपना व्यापार कर सकेंगे युवा भी इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साहित है उनका कहना है कि पहाड़ पर ट्रेन के जाने से पलायन पर विराम लग सकता है
दरअसल कर्णप्रयाग रेल लाइन के निर्माण के दौरान पहाड़ से निकालने वाला मलबा भी काफी कारगार साबित होगा इस भी सड़क बनाने के साथ कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकेंगा . इसके लिए 31 विशेष डंपिंग जोन भी बनेंगे और यही वजह है लोग काफी उत्साहित है क्योकिं पहाड़ पर ट्रेन जाने से कई फायदे होंगे आपको बता दें कि ऋषिकेश के इसी स्थान तक ट्रेन आती है इसके आगे अभी ट्रैक बिछाने की योजना चल रही है
फिलहाल लोगों की उम्मीदों को पर लग रहे है आने वाले सात साल के बाद पहाड़ पर तेजी गति के साथ ट्रेन दौड़ती नजर आयेगी और पहाड के लोगों के पहाड़ जैसे दर्द भी कम होंगे क्योंकि उनका सस्ता और आरामदेह यात्रा का मौका मिलेगा
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में ट्रेन चलाने का सपना साकार होता नजर आ रहा है , रेल विकास निगम लिमिटेड की टीम लगातार प्रोजेक्ट पर काम कर रही है जिससे ट्रेन को निर्धारित समय पर कर्णप्रयाग तक पहुंचाया जा सकें इसके लिए काम चल रहा है ऋषिकेश से कौन ट्रेन कितनी स्पीड से चलेगी इसको लेकर प्लान फाइनल हो चुका है
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक चलने वाली ट्रेन 90 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलेगी , साथ में पहाड़ में जाने वाली मालागाड़ी 65 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड़ से चलेगी जिसका खाका तैयार किया जा चुका है ,परियोजना के सहायक मैनेजर ओपी मालगुडी का कहना है कि लगातार निर्माण कार्यो की समीक्षा हो रही है साथ ही पहाड़ में बनने वाले ब्रिज और टनल को बनाने की प्रक्रिया शुरु की जा रहा है उनका कहना है कि जमीन के अधिग्रहण का भी काम किया जा रहा है , साथ ही वन , सरकारी और स्थानीय लोगों से भूमि अधिग्रहण को लेकर काम किया जा रहा है उनका कहना है कि क्योंकि रेल ट्रैक का करीब 85 फीसदी हिस्सा टनल में बनेगा इसलिए जो भी जरुरी कदम है उठाये जा रहे है
जिसके आधार पर इस रेलवे लाइन के बिछाने का काम होगा , कहां कहां रेलवे स्टेशन बनेंगा यह सब फाइनल हो चुका है ,बताया जा रहा है कि व्यासी और देव प्रयाग के स्टेशनों के बीच एक जगह पर ट्रेन पहाड़ में करीब 1 किलोमीटर नीचे टनल में चलेगी जो बहुत ही रोमांचकारी सफर होगा , इस ट्रैक पर सबसे लम्बा 15 किलोमीटर का एक अकेला टनल होगा
दरअसल चमोली जिले की सीमा चाइना के लगती है ऐसे में सामरिक नजारिए भी यह प्रोजेक्ट काफी महत्वपूर्ण है क्योकिं कर्णप्रयाग तक अगर ट्रेन पहुंची है बॉर्डर की आंतरिक सुरक्षा को भी काफी मजबूती मिल सकती है . लोगों का कहना है कि यह ट्रेन हर तरह से पहाड़ के लोगों के लिए फायदेमंद होगी
फिलहाल जिस रफ्तार के साथ काम चल रहा है ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि पहाड़ पर ट्रेन के दौडने का सपना आने वाले सालो में जरुर साकार होगा
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