देहरादून
राम अनुज
उत्तराखंड में अब कुल कितने राज्यपाल हुए
उनका कार्यकाल ,बेबीरानी मौर्य बनीं नई राज्यपाल
उत्तराखंड के सातवें राज्यपाल के तौर पर बेबी रानी मौर्य पदभार ग्रहण करने जा रही हैं बेबी रानी मौर्य का राजनीतिक राजनीतिक सफर की शुरूआत दुनिया के सातवें अजूबे में शामिल शहर आगरा से होती है बेबी रानी मोरनी 1995 में निकाय चुनाव में जीत हासिल की और पहली बार वह आगरा की महापौर की कुर्सी को संभाला ।
लगातार वह भाजपा के कई प्रकोष्ठों में काम करती रही राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा के कोषाध्यक्ष के पद पर भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया 2001 में प्रदेश सामाजिक कल्याण बोर्ड के सदस्य के तौर पर उन्होंने काम किया
उनके काम की निष्ठा, कर्मशीलता को देखते हुए पार्टी ने 2002 में राष्ट्रीय महिला आयोग आयोग के सदस्य के लिए नामित किया
इस तरह से वे कई महिला संगठनों के साथ और महिला उत्पीड़न नारी सशक्तिकरण के प्लेटफॉर्म पर काम किया ।
2007 में बेबी रानी ने एत्पादपुर विधानसभा से चुनाव लड़ा और वह दूसरे स्थान पर रही
2013 से 2015 तक प्रदेश महामंत्री के तौर पर काम करता करती रही
राष्ट्रीय परिषद के मेंबर के तौर पर अभी वह काम कर रही हैं उन्हें 1996 में समाज रत्न पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया
फिलहाल उनके काम की निष्ठा समर्पण और पार्टी के लिए त्याग को देखते हुए 22 अगस्त को केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर नियुक्त करने का फैसला किया
यह फैसला उस वक्त आया जब वह डेढ़ महीने के प्रवास पर अमेरिका में थी 15 अगस्त 1956 को बेबी रानी का जन्म हुआ बेबी रानी की शादी प्रदीप कुमार से हुई उनके एक बेटा और एक बेटी है बेटा अभिनव कुमार की शादी आगरा में हुई है जो अमेरिका में इंजीनियर के पद पर काम करते हैं और उनकी बेटी की शादी बेंगलुरु में हुई है और वह अपने पति के साथ अमेरिका में जॉब करती हैं
इस तरह से उनके दोनों बच्चे अमेरिका में एक निजी कंपनी में जॉब करते हैं
आपको बता दें कि प्रदीप कुमार के पिता मगनदास आईपीएस के रिटार्यड है
जिन्हें प्रशासनिक सेवा में बहुत लंबा तजुर्बा रहा और यही वजह कि मगनदास अपने परिवार को अनुशासित रखा और उनके बेटे प्रदीप कुमार पंजाब नेशनल बैंक में और दूसरे बेटे राजेश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी करते हैं
राजेश कुमार का परिवार मुंबई में रहता है राजेश कुमार के एक बेटी एक बेटा है बेटी का नाम प्रियांशु और बेटे का नाम प्रणव है पूरा परिवार उनका मुंबई में रहता है फिलहाल राजेश कुमार देहरादून मेरठ, आगरा जैसे शहरों में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं
दरअसल IPS मगनदास उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के अजनोट गांव के रहने वाले हैं जहां से उनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा हुई थी इस तरह से पूरे परिवार के सभी सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते रहे है सामाजिक ताने-बाने के साथ उनके परिवार के सभी लोग काफी मृदुभाषी शालीन और सरल है
बेबी रानी मौर्य का राजनीतिक इतिहास बहुत लंबा है उन्हें जहां पार्टी संगठन का अनुभव और पूरे उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में काम करने का अनुभव है
वही उनकी निष्ठा उनकी काबिलियत उनके स्वभाव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें एक नई जिम्मेदारी सौंपी है पूरा परिवार उनके राज्यपाल बनने से काफी खुश है परिवार के सदस्यों का कहना है कि जिस तरह से बेबी रानी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन और अपने कार्यों का संपादन पूरी निष्ठा लगन और इमानदारी ,तत्परता के साथ करती रही है आज पार्टी ने उन्हें राज्यपाल नियुक्त करके एक बहुत बड़ा तोहफा दिया है
यह तोहफा दूसरे पार्टी वर्कर्स के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत है क्योंकि उन्होंने हर वक्त अपनी पार्टी को बुलंदियों तक ले जाने की कोशिश की है
फिलहाल अब उन्हें एक संवैधानिक पद की जिम्मेदारी मिलने जा रही है और यह पद उनके अनुभव और उनके त्याग का जरूर अच्छा परिणाम देगा वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी ट्वीट करके उनको बधाई दी है और कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि उनके अनुभव और उनके त्याग संगठन में काम करने की शैली उत्तराखंड को प्रगति के मार्ग पर ले जाएगी इस तरह से अब वो एक नई नई जिम्मेदारी के साथ काम करने के लिए फिर से सामने आ रही है जल्दी उन्हें उत्तराखंड के नए राज्यपाल के तौर पर जिम्मेदारी मिलेगी
बेबी रानी उत्तराखंड के 7 वें राज्यपाल के तौर पर पदभार ग्रहण करने जा रही है 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड का निर्माण हुआ था उत्तराखंड के पहले राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला ने 9 नवंबर 2000 से लेकर 7 जनवरी 2003 तक अपना कार्यकाल पूरा किया और इस तरह से वे उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर 2 साल 1 महीना 29 दिन तक राजभवन में रहे इसके बाद सुदर्शन अग्रवाल ने उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर पदभार ग्रहण किया 8 जनवरी 2003 से लेकर 28 अक्टूबर 2007 तक वे उत्तराखंड के राज्यपाल रहे और उनका कार्यकाल उत्तराखंड के सभी राज्यपाल में सबसे लंबा कार्यकाल था
क्योंकि राज्यपाल के तौर पर 4 साल 9 महीना 20 दिन तक अपने दायित्वों का निर्वहन किया था
जब पहली बार उत्तराखंड में एनडी तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी थी
बनवारी लाल जोशी 29 अक्टूबर 2007 को उत्तराखंड के तीसरे राज्यपाल बने 5 अगस्त 2009 तक उत्तराखंड के राज्यपाल के पद भार को संभालते रहे इस तरह से उनका कार्यकाल 1 साल 9 महीना और 7 दिन का रहा है
चौथे राज्यपाल के तौर पर मार्गरेट अल्वा ने 6 अगस्त 2009 को अपना पदभार ग्रहण किया 14 मई 2012 तक उत्तराखंड के राज्यपाल रही वे पहली उत्तराखंड की राज्यपाल हैं जिन्होंने 2 साल 9 महीना और 8 दिन तक अपना कार्यकाल पूरा किया
इस तरह से पांचवे राज्यपाल के तौर पर अजीज कुरैशी ने उत्तराखंड के राज्यपाल की संवैधानिक पद की कुर्सी संभाली 15 मई 2012 से 7 जनवरी 2015 तक उत्तराखंड के राज्यपाल रहे और इस तरह से अजीज कुरैशी उत्तराखंड के 2 साल 7 महीना और 23 दिन तक राज्यपाल रहे
छठे राज्यपाल के तौर पर कृष्णकांत कॉल 8 जनवरी 2015 को उत्तराखंड के राज्यपाल बने और 21 अगस्त 2018 तक उत्तराखंड के राज्यपाल रहे
इस तरह से देखा जाए तो सुदर्शन अग्रवाल के बाद सबसे ज्यादा उत्तराखंड के राज्यपाल रहने का उनको श्रेय है और वह 3 साल 7 महीना और 13 दिन तक उत्तराखंड के राज्यपाल रहे
और इस तरह से उत्तराखंड के सभी राज्यपालों का कार्यकाल काफी अहम रहा क्योंकि उत्तराखंड में राजनीतिक उथल पुथल का दौर काफी लंबे समय तक चलता रहा
आखिर में बेबी रानी मौर्य को 22 अगस्त 2018 को एक बार फिर साथ में राज्यपाल के तौर पर कमान संभालने का मौका मिलने रहा है अब देखना यह है उनका कार्यकाल किस रूप में याद किया जाता है
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